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परमाणु का नाम अमर रखा..


कुछ दिनों पहले मैंने अपनी ज्यादाद के लिए एक वारिस को चुना। वह एक परमाणु था। जिसका नाम मैंने अमर रखा। अब वह कुछ दिनों से गायब है। उस परमाणु अर्थात अमर को ढुड़ने के लिए विज्ञान के पास कोई भी युक्ति नहीं है। हाँ, संरचना को आधार मानकर उसकी खोज की जा सकती है।
संरचना से अभिप्राय : उसका स्वतंत्र अस्तित्व होना।
उस संरचना के समान दूसरा अन्य परमाणु ना होना।

स्वतंत्र अस्तित्व होने के कारण ही, मैं उसका नाम अमर रख सका। यह कारण अन्य दुसरे कारण से भिन्न है। संरचना ही किसी भी वस्तु, जीव, जंतु, पौधा, निर्जीव या विषय की प्रकृति निश्चित करती है।
Imageविज्ञान के पास विशिष्ट संरचना ही एक मात्र विकल्प है। जिसे वह ईश्वर की उपस्थिति के रूप में प्रयुक्त कर सकता है। जिसे ब्रह्माण्ड के स्वरुप द्वारा जाना जाता है। जो अपरिवर्तित है। जिसके आधार पर प्रकृति निर्धारित होती है। अपरिवर्तित होने के कारण, इसे “आधारभूत ब्रह्माण्ड” कहना उचित होगा। परन्तु वर्तमान में यह संरचना मनुष्य को ज्ञात नहीं है।


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